Sunday, 14 August 2022
कुछ बातें ....25
इंसान सोचता है कि उसने बहुत कुछ सीख लिया है दूसरों के मुकाबले।पर, जैसे ही वह अपनों के बीच से होकर गुजरता है, एक नया अध्याय खुल जाता है।जिसके पन्ने तो उसने कभी पलटे ही न थे।बार-बार उसे एहसास होता है कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।जीवन की असली पढ़ाई तो डिग्रियां पाने के बाद शुरू होती है।इंसान जीवन भर पढ़ता और सीखता रहता है।जीवन की पढ़ाई में डिग्रियां उसके सही निर्णयऔर लोगों की पहचान ही होते हैं।जब इंसान पहचान करना सीख जाता है तब वह पास भी होने लगता है।
- संगीता
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अपनी ओर
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...