वह मुझे लिखता रहा
पर ,अभिव्यक्त न किया
शब्द -शब्द से मेरी आत्मा
खरोंचता रहा ....
नोंकदार कलम भी
शूल से चुभते हैं...
काट सकता था वो मुझसे
कालिमा के अम्बार को
मेरे प्राण को वो
मुझसे हरने लगा
-संगीता
पर ,अभिव्यक्त न किया
शब्द -शब्द से मेरी आत्मा
खरोंचता रहा ....
नोंकदार कलम भी
शूल से चुभते हैं...
काट सकता था वो मुझसे
कालिमा के अम्बार को
मेरे प्राण को वो
मुझसे हरने लगा
-संगीता