Tuesday, 26 April 2022
कुछ बातें ..13
तुम मेरी कातिल हो ,मेरे दिल की कातिल हो,तुम्हारे जैसा पत्थर मैंने नहीं देखा था।तुम मेरी ज़िंदगी मे क्यों आई जब तुम्हे जाना ही था ,तुम किसी की नही हो सकती हो,तू जिंदगी में अकेली ही रह जाओगी तुम्हें मेरे जैसा कोई नही मिलेगा ....नलिनी चुप ..और रीमा लगातार कभी खुद को कभी नलिनी को कोसती रहती ।कभी उस मिलने की जगह को धिक्कारती।रीमा का आँसुओं से भीगा चेहरा और सूखते जज्बात जैसे उसे सांस भी नही लेने दे रहे थे।कोई क्यो दिल को इतना तार-तार कर देता है कि जिसमें मन उलझकर रह जाता है।
किसी की यादों से खुद बाहर करना समुद्र के गर्त से बिना ऑक्सीजन बाहर आने से भी दुष्कर है।रीमा ने ऐसा तो कभी न चाहा था कि उसे किसी के लिए इतना विवश होना होगा कि उसे अपने आत्मसम्मान की भी आज सुध न रही।प्रेम की कोई परिधि क्यों नही है की इंसान तय कर लेता की मुझे परिधि से बाहर नहीं जाना।इस प्यार की रफ्तार का कोई मापक यंत्र होता तो जान पति की ये आँखों के रास्ते दिल को पार कर जाता है।मन बस उसे ही ढूढता है।जिसे प्यार की कोई परवाह ही नही।रीमा अब उसकी एक एक याद से संवाद करती है।
मेरी ही कलम से
डॉ०संगीता
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