Sunday, 2 June 2024

कुछ बातें 39

 हथेली पर मेहंदी रचती तो है

पर खिलती नहीं

कैनवास सी हथेलियों पर

तुम कुछ उकेर दो

खिल जाएंगी ये

कमलदल की तरह

शब्द गढ़ने वाला मन का कुरूप भी हो सकता है

एक ही सवाल मन में  कब से है 

कोई टूट क्यों जाता है,

मेरे जबाब से 


मैं अक्सर कुछ  का दिल तोड़ दिया करती हूँ
उनकी ही बातों से 
उनका रुख मोड़ दिया करती हूँ...

साथ चलकर कुछ दूर ....
वापस वो मुड़ न जाए
सोच कर ही मैं 
साथ छोड़ दिया करती हूँ
 Dr. Sangita



अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...