Monday, 5 April 2021
कुछ बातें ....1
कभी कभी कुछ ऐसा लिखने को जी चाहता है,जो इंसान अपने लिए सुनना चाहता है।कुछ ऐसे शब्द,कुछ ऐसे भाव जो सिर्फ और सिर्फ अपने लिए हो ,कोई भी उन शब्दों को बाँट न सके।ऐसे संवादों के लिए कम से कम दो दिलों का एक रिश्ता चाहिए।उसे नाम देना जरूरी नही ,वो रिश्ता बिन समझाये ही समझ में आने लगता है।शुरू करते हैं कुछ शब्द अपने लिए...
- मैं आपका बहुत खयाल रखना चाहती हूँ।मैं चाहती हूँ आप मुझे जितना प्यार देती हैं, उतना ही और वैसे ही आपको भी दूँ।आप मेरी दुनिया हो ....
-(अलौकिक आनन्द के साथ आंखों में कुछ बूंदें लिए गले लगाते हुए)तुमने ऐसा कहा .....मेरे लिए,यही मेरे लिए बहुत है।मैं चाहती हूँ कि जब भी मुझे तुम्हें गले से लगाकर,अपने कलेजे की ठंडक को महसूस करने का जी करे ,उस समय तुम मेरे पास हो...
1-यह किससे किसने कहा होगा...?
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अपनी ओर
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...
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