Monday, 21 January 2019

प्यार के मायने...

मीलों दूर होकर भी 
जो साथ -साथ चलता है,
पथरीली जमीन को ,जो
मखमल सा करता है,
वो कहता है ...
कभी मुझे गिरने न देगा
मेरी नजरों में जो आसमान चढ़ता है,
लीक से उतर
वो ,प्यार के मायने गढ़ता है.....
                              -संगीता


Friday, 18 January 2019

साथ...

हर साथ,साथ नही होता
कुछ रह सा जाता है
साथ चलने से भी...
कदम -कदम बढ़ना ही बढ़ना नही
बढ़ जाता है कोई
पीछे रह के भी...
                    -डॉ० संगीता

Thursday, 17 January 2019

कदम थकते नही...

उसूलों की पथरीली राह पर
जिद के उभरे काँटे
जिस्म को चुभती  सी आवाज
और,विरोधों की मिलती पगडण्डियों ने
चलना मुश्किल किया ...
फिर भी, कदम हैं कि थकते नहीं
निःस्वार्थ की ओढ़ कर चादर
खारे जल में कमल उगाते
सम्वेदनाओं की सीढ़ियों से
गहरे उतरते...
गिरते हैं, सम्भलते हैं,
फिर भी,कदम हैं कि थकते नहीं..
                            -डॉ०संगीता

Sunday, 13 January 2019

जो दिखता नही...

आज फिर देखा
किसी को टूटते हुए 
पत्तियों को शाख से छूटते हुए
वो डोर जो दिखती नही थी 
खुली आँखों से ,
आज गाँठे महसूस ली 
बंद आँखों ने,
फिर सागर में आँखों से मोती गिरी ....
                                        -संगीता

उस ओर .....

 दुर्गन्ध की दुनिया में
 वो अकेला नही है,
त्याज्य को जीविका का साधन बनाकर 
कौन भला सुख पाता है..
सफाई की दुनिया को छोड़,
उस ओर भला कोई जाता है...?
                               -संगीता

सिलता है वो....

दरारों से जो झांकता है दर्द बनकर
वो दरारों की वजह भी है,
स्पर्श की सुई में प्रेम के धागे से
सिलता है वो किनारों को,
जिसमें दर्द बंद होता है .....
                            -संगीता
                       

Thursday, 10 January 2019

वो पत्तों पर ठहरता है

सर्द रातों में बर्फ सा
जम जाता है वो,
किसी कुंद अवसाद सा ,
पिघलता ही नही गर्मजोशी से भी...
वो पत्तों पर ठहरता है ....
                           -संगीता



अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...