मीलों दूर होकर भी
जो साथ -साथ चलता है,
पथरीली जमीन को ,जो
मखमल सा करता है,
वो कहता है ...
कभी मुझे गिरने न देगा
मेरी नजरों में जो आसमान चढ़ता है,
लीक से उतर
वो ,प्यार के मायने गढ़ता है.....
-संगीता
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...