Saturday, 27 July 2019

ऐसा लगता है..

  तुम हवाओं में घुले हो
किसी सुगन्ध की तरह ,
मोतियों की लड़ियाँ 
जैसे टिकी हों डालियों पर
तुम हल्के झोंके संग 
छू जाते हो 
और,
मिटा देते हो झटके से 
मोतियों का रूप....
देकर अपनी सुगन्ध...
               -संगीता



Saturday, 13 July 2019

समझ नही आता...

तुम्हारी आँखों  मे झिलमिल सा
जो तैरता रहता है,
वो कब मेरी आँखों मे उतर आता है
समझ नही आता....
                          -संगीता

Thursday, 11 July 2019

ये बारिश...

ये बारिश....
बाहर भी, भीतर भी
तन भीगे न भीगे ,
मन भीग कर गुनगुनाता है।
कोई है जो ख्वाबों में ,
कभी ख्यालों में,
कभी सामने से मुस्कुराता है....
ये तो कहने की कोई बात ही नही ...
जो भीगा वो डूब जाता है,
जो डूबा ,
वो पार नही पाता है.....
                                    -संगीता

भीगते हुए....

बूँदों ने दस्तक दी ,
तुम आ गए हो ....
खिड़की से लिपटी नन्ही पत्तियों पर
ठहरे हुए से तुम ,
मुझको भी बाहर बुला रहे हो ....
                             -संगीता


अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...