Sunday, 18 September 2022

कुछ बातें ....26

किसी की आहट जब हर वक्त आए और वो इंसान आपके सामने नजर न आए.......बहुत सीधी सी बात होती है कि आपको उससे प्यार है.पर,जब कोई हर वक्त भौंहों पर चढ़ा रहे जिसे हम देखना भी पसन्द न करते हों तो वह घृणा होती है जो इंसान को भीतर ही भीतर जलाती है.प्रेम जहाँ चेहरे को खिला देता है वहीं घृणा चेहरे को झुलसाने लगती है. सबकुछ जानते हुए भी हम झुलसते रहते हैं.रोहित की दिन-दिन बढ़ती बेरुखी सीमा को अंदर से तोड़ रही थी पर,उसके होंठ खुल न पाते.उसके जी में आता कि वो सबकुछ कह ले, जो कहना चाहती है....... रोहित की हरकतें उसे कितनी चुभती हैं वो बताना चाहती थी,पूछना भी चाह रही थी कि एक आदमी अपना काम धंधा करता है . शादीशुदा होते हुए भी किसी और औरत के पास क्यों जाता है. ऐसा क्या है जो उसे वहाँ मिलता है जो घर मे नहीं मिलता...?उसे वहाँ एक ऐसी औरत मिलती है जो अपना अधिकार नहीं जता सकती. लड़ नहीं सकती....जिसे लेकर आदमी बाहर नहीं जाता एक कमरे में अपनी वो इच्छा पूरी करता है जो वह घर मे नहीं कर पाता. उस औरत से उसे कोई मतलब नहीं होता. बस मतलब होता है तो इतना ही कि अपनी इच्छा पूरी करता रहे...और वो औरत उससे कोई सवाल नहीं करे. उसे तो आना है और अपना काम करके चलते बनना है.इसे क्या प्यार कहा जाएगा....?उस पर उस औरत की कोई जिम्मेदारी नहीं होती वह क्या करती है क्या नहीं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. समाज मे ऐसी औरतों का कोई अस्तित्व नहीं होता. आज के समय मे लोग कोठे पर नहीं जाते. किसी न किसी को मैनेज कर के रखते हैं.बेवक़ूफ़ बना कर रखते हैं. उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि इससे उस औरत को क्या फर्क पड़ता है...ऐसी औरतें न घर की रहती हैं न घाट की....ऐसी औरतो को क्या कहा जा सकता है.....? मेरी ही कलम से...

अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...