नन्ही सी शाख पर आती नही
कोई कोमल सी मुस्कान
फिर कोई गर्म पानी सा
जड़ों को छू गया....
दर-दर भटका था जो
चंद टुकड़ो के लिए
आज फिर उसी तरह
खुद को खो गया...
काश कुछ निवाले
भूख को मिटा दे
यही सोचकर
वह,आज फिर सो गया....
-संगीता
कोई कोमल सी मुस्कान
फिर कोई गर्म पानी सा
जड़ों को छू गया....
दर-दर भटका था जो
चंद टुकड़ो के लिए
आज फिर उसी तरह
खुद को खो गया...
काश कुछ निवाले
भूख को मिटा दे
यही सोचकर
वह,आज फिर सो गया....
-संगीता