Saturday, 8 July 2023

कुछ बातें...33

 1 काश कि फोन में चेहरे उभरे हुए होते तो उन्हें छू कर हम महसूस कर सकते 

2 काश कि फोन में चेहरे उभरे हुए होते तो उन्हें छू कर हम महसूस कर सकते 

3 काश कि फोन में चेहरे उभरे हुए होते तो उन्हें छू कर हम महसूस कर सकते 

4  कुछ  भी  कह  ले  जिंदगी तुझे जीना  है  जी  भर कर

कितना  भी  बच  ले  तू पानी  से  तुझे  भिगोना  है  जी भर  कर 

5 एक आदमी अपना काम धंधा करता है .  शादीशुदा  होते  हुए  भी  किसी  और  औरत  के  पास  क्यों  जाता  है. ऐसा  क्या है  जो उसे वहाँ  मिलता  है जो  घर  मे  नहीं  मिलता...?उसे वहाँ  एक  ऐसी औरत  मिलती  है  जो  अपना  अधिकार  नहीं  जता  सकती. लड़ नहीं  सकती....जिसे  लेकर  आदमी  बाहर  नहीं  जाता  एक  कमरे  में  अपनी वो  इच्छा पूरी करता है जो  वह  घर  मे नहीं कर पाता. उस औरत से  उसे  कोई  मतलब  नहीं  होता. बस मतलब  होता है  तो  इतना  ही कि अपनी इच्छा पूरी करता रहे...और  वो औरत उससे  कोई  सवाल  नहीं  करे. उसे तो आना है और अपना काम करके चलते बनना है.इसे क्या प्यार कहा जाएगा....?उस पर उस औरत की कोई जिम्मेदारी  नहीं होती वह क्या करती है क्या नहीं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. समाज मे ऐसी औरतों का कोई अस्तित्व नहीं होता. आज  के समय मे लोग कोठे पर नहीं जाते. किसी न किसी को मैनेज कर के रखते हैं.बेवक़ूफ़ बना कर  रखते हैं. उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि इससे उस औरत को क्या फर्क पड़ता है...ऐसी औरतें न घर की रहती हैं न  घाट की....ऐसी औरतो को क्या कहा जा सकता है.....?

7 सोशल मीडिया.....देखा  जाए तो आपकी दिनचर्या और आपके भीतर चल रहे,सवालों और बदलावों का आईना भी होते हैं। उसी में एक है बार- बार या लगभग रोज ही अपनी स्टेटस प्रोफाइल पिक्चर बदलना।वो भी तब ....जब आप स्वयं को बहुत व्यस्त दिखाते हों। जो कि, यह दर्शाता है कि आप अपने व्यक्तित्व को किसी खास उद्देश्य से ही दिखाना चाहते हैं। ...उद्देश्य तो देखने वाला समझ ही जाता है। एक  तरह से सोशल साइट्स आपकी हरकतों की पोल खोलते रहते हैं। 

       ....मेरी ही कलम से 


Friday, 7 July 2023

कुछ बातें..31

 बहुत ही सलीके से ,करीने से सजा कर रख देने से रिश्ते कभी भी महकते नहीं हैं...सभी चाहते हैं कि उनकी ताजगी बनी रहे... इसके लिए उनके निजत्व में बेवजह की ताक -झाँक जरूरी नहीं ...जेहन में एक कशिश सी महसूस होना जरूरी है...जब यह कशिश कम लगने लगे तो बातों की डोर थामे रखना जरूरी हो जाता है...रिश्ता कोई भी हो जब वह मुरझाने लगता है तो बीती मधुर स्मृतियों से उन्हें बार -बार हरा किया जा सकता है....कोई भी रिश्ता कभी भी पूरी तरह नहीं टूटता....कुछ न कुछ बचा रह जाता है किसी न किसी रूप मे... लेकिन जब कोई रिश्ते से बाहर आने के लिए मन बना ले तो उसे रोकना मुमकिन नहीं क्योंकि रिश्ता बहुत ही जटिल भाव है इसमें बंधने से पहले और मुक्त होने के बाद ही हम जान पाते हैं कि हम रिश्ते में है या नहीं....अपने मन को संयमित रखना बहुत जरूरी है.

                        मेरी ही कलम से.....

अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...