Friday, 18 March 2022

कुछ बातें..12

अपने जीवन में इंसान जब अकेलेपन से जूझ रहा होता है, तो उसे वो खुशनसीब लम्हे बार -बार याद आते हैं।जिनकी सुखद स्मृतियां आँखों में उभर आती हैं और आँखें बेतहाशा रो लेना चाहती हैं जीभर।जब तक इंसान को एक सच्चा साथी नहीं मिलता वो उसके होने और एक न एक दिन मिल जाने की उम्मीद में अपना समय बिता लेता है पर साथी गर न हो तो जीवन कितना रंग और गन्धहीन लगता है।इसे तो वही करौच पक्षी ही समझ सकता है जिसे देखकर महाकवि वाल्मीकि के कंठ से विप्रलम्भ श्रृंगार फूट पड़ा था। शालिनी की दुनिया में समीर के अलावा कौन था जो उसके हर कदम पर फूल बिछा सकता था।उसके स्कूटी चलाते देख उसे कवर करता हुआ अपनी बाइक के साथ -साथ अंगरक्षक सा चल सकता था।उसकी हर एक आवाज से सुख-दुख को जान सकता था ।कोई नही था उसका जो उसे हर पल यह एहसास दिला सकता था कि तुम मेरे हो और तुम मेरे ही रहोगे।और भी बहुत कुछ।एक लड़की यही तो चाहती है कि वह अपने प्रेमी की पहली पसन्द और पहला एहसास हो...वही तो था समीर।फिर,ऐसा क्या हुआ कि समीर ने शालिनी को अपनी से इस कदर अलग कर लिया कि जैसे कभी जानता ही न था।शालिनी हर कॉल पर उसको ही समझकर दौड़कर फोन के पास जाती और अपने होठों की मुस्कान वहीं छोड़ आती।समीर में ऐसा क्या था जो अदृश्य तरंगों सा उससे आकर टकराता था।शालिनी कुछ भी सह सकती थी पर,समीर की बेरूखी उसे जीने नही दे रही थी...ये बात समीर को भी पता है फिर भी...... मेरी ही कलम से -डॉ०संगीता

अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...