जीवन कितना रीता था.…
तुम्हारे न होने से ,
एक किलकारी ने
भर दिया था जहाँ सारा
खिलती दो दतियाँ
छिपने लगीं होठों के बीच,
बिखरती मुस्कान के पीछे
मुश्किलों से लड़ना...
तुम कब सीख गए
प्रेषित कर देते हो खुशियाँ...
दूसरों के दुख सुनकर,
तुममें इतनी विशालता
कहाँ से आई ...
-संगीता
तुम्हारे न होने से ,
एक किलकारी ने
भर दिया था जहाँ सारा
खिलती दो दतियाँ
छिपने लगीं होठों के बीच,
बिखरती मुस्कान के पीछे
मुश्किलों से लड़ना...
तुम कब सीख गए
प्रेषित कर देते हो खुशियाँ...
दूसरों के दुख सुनकर,
तुममें इतनी विशालता
कहाँ से आई ...
-संगीता