Friday, 17 October 2025

अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो

आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो

अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे

कहने वाले, सुनने वाले,घावों को बहते देखेंगे

घनघोर निराशा के बादल,तुमको न सफल बनने देंगे

पीड़ाओं के ये बढ़ते वन,पथ में कांटे बिखरा देंगे

मिलेंगे बहुत समझाने वाले,चलते-पथ से भटकाने वाले 

अपना मन बहलाने वाले, बीच अधर लटकाने वाले

आसान न होगी एक डगर,रुकना नहीं है तुमको मगर

 उल्टी धारा में उतरे तो,मौजों की उंगली तोड़ो तो,

यह तुम पर ताने कसने वाले,तुमसे ही मिलने आएंगे

सब राग द्वेष को भूल -भाल, बस एक राग में गाएंगे

संघर्ष शिशिर का सूरज है,जुगनू मन वाले क्या जानें

 तुमने जो तप से साध लिया,ये मूल्य कोई क्या पहचाने

तुम शोक -सोच को परे धरो,मन में लिए मशाल बढ़ो

लघुता- जड़ता से निकलो तो,अपनी आभा को परखो तो 

सब तूफानों की राह बदल,तुम भीग चुके अब बरसों तो

- डॉ संगीता 

Friday, 10 October 2025

संसार जिसे मैंने चुना

 मेरी हर कविता उसी से शुरू हुई

जिसने मेरी नजरों को पल भर के लिए बांधा था

जीवन का सबसे बड़ा भ्रम प्रेम

सबसे बड़ा छल मोह

खुद को समर्पित करना सबसे बड़ी भूल बन गया

क्योंकि वह फूल बनकर कांटो सा तन गया

समझदारी की पहली ठोकर

लड़खड़ाते हुए गिरने का पहला अनुभव

अनुभवहीन क्या समझेगा

इन पुतलियों पर चढ़ी परतों ने देखते ही न दिया था

सत्य का स्वरूप तो कुछ और ही था

शीशे में खुद को देखा

नियति पीछे से मंद मुस्कान लिए मुझे घेर रही थी

मेरा दुख, मेरी खुशी,मेरा हंसना, मेरा रोना,

मेरे अरमान,मेरे सपने,मेरी छाया, मेरी पहचान,

हर जगह "मैं " से ही भरी थी

इतनी सीमित संकीर्ण दुनिया मेरी नहीं थी

इसे पहचान में सालों गवा दिए

किस ओर बढ़ रही थी और किसी लिए हुए?

क्या वह मेरा था?

जिसे जकड़े बैठी थी

वह मेरा है, सिर्फ मेरा है और मेरा ही रहेगा

यही भ्रम पाले थी

शरीर को तेज जकड़ने से मन पहले मुक्त हो जाता है

फिर, वह वापस कभी नहीं आता

इतनी छोटी सी दुनिया नहीं है मेरी

अपने होने का कारण समझना होगा

व्यष्टि से समष्टि की ओर बढ़ना होगा

मेरी दुनिया का विस्तार अनंत है

मुझे नया संसार चुनना होगा

डॉ संगीता 

अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...