जैसे जिंदगी एक तलाश थी
तुम पर आकर रुक गई।
कतरा-कतरा बह रहा तूँ
रग-रग में जैसे ....
शाम ए जिंदगी की बाती
तुमसे मिलके जल उठी।
-संगीता
तुम पर आकर रुक गई।
कतरा-कतरा बह रहा तूँ
रग-रग में जैसे ....
शाम ए जिंदगी की बाती
तुमसे मिलके जल उठी।
-संगीता
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...
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