अपनी जमीं भर के लिए आसमाँ ढूंढ़ना
टूटते पत्तों से हालात पूछना,
काफी तो नहीं....
खुल गई किवाड़ ,
पर आना निषेध है....।
गिरे थे जहाँ से
वो,भावों का शिखर था
संभल गए जहाँ,
वहाँ अपना कोई रहा.....।
सच को सिरे से नकारती,
हर नजर में अंगुलियाँ छुपी हुई रही....
मिलते ही नजर,
सब मेरी ही ओर थी.....
-संगीता
टूटते पत्तों से हालात पूछना,
काफी तो नहीं....
खुल गई किवाड़ ,
पर आना निषेध है....।
गिरे थे जहाँ से
वो,भावों का शिखर था
संभल गए जहाँ,
वहाँ अपना कोई रहा.....।
सच को सिरे से नकारती,
हर नजर में अंगुलियाँ छुपी हुई रही....
मिलते ही नजर,
सब मेरी ही ओर थी.....
-संगीता
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