चलते-चलते यूँ ही हौले से
छूकर गुजर गया कोई ....
बिन बात किए ,सब मन मे लिए
मुस्कान सा बिखर गया कोई ....
तितलियों की रंगीनी उधार लेकर
गुलाल सा बनता रहा कोई ....
खिलते गुलाब की पंखुड़ी पकड़कर
खुशबू सा महकता रहा कोई.....
उदासियाँ मेरी जाम में मिलाकर
घूँट-घूँट जब -तब पीता रहा कोई ....
रखकर मुझको बेखबर जमाने से
मौन से जज्बात जताता रहा कोई...
जिसे जान न सकी खुली निगाह मेरी
मुझे बन्द आँखों से भी पहचानता है कोई ...
वक़्त -बेवक़्त छूट जाता है हर लम्हा
कानों में सरगोशियों सा ठहरा हुआ है कोई ....
उँगलियों में महक है आज भी अनजानी सी
नजर है हर तरफ ...पर दिखता ही नहीं है कोई.....
-संगीता
छूकर गुजर गया कोई ....
बिन बात किए ,सब मन मे लिए
मुस्कान सा बिखर गया कोई ....
तितलियों की रंगीनी उधार लेकर
गुलाल सा बनता रहा कोई ....
खिलते गुलाब की पंखुड़ी पकड़कर
खुशबू सा महकता रहा कोई.....
उदासियाँ मेरी जाम में मिलाकर
घूँट-घूँट जब -तब पीता रहा कोई ....
रखकर मुझको बेखबर जमाने से
मौन से जज्बात जताता रहा कोई...
जिसे जान न सकी खुली निगाह मेरी
मुझे बन्द आँखों से भी पहचानता है कोई ...
वक़्त -बेवक़्त छूट जाता है हर लम्हा
कानों में सरगोशियों सा ठहरा हुआ है कोई ....
उँगलियों में महक है आज भी अनजानी सी
नजर है हर तरफ ...पर दिखता ही नहीं है कोई.....
-संगीता
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