भीड़ में भी
अकेला हुआ इंसान
उसको तो खुद की नही पहचान
रूठ जाते हैं अपने ही
परायों की किसको है परवाह
जोड़कर हृदय से हृदय का नाता
तोड़ देता है कोई विश्वास
-संगीता
अकेला हुआ इंसान
उसको तो खुद की नही पहचान
रूठ जाते हैं अपने ही
परायों की किसको है परवाह
जोड़कर हृदय से हृदय का नाता
तोड़ देता है कोई विश्वास
-संगीता
No comments:
Post a Comment