Friday, 11 November 2022

कुछ बातें...28

कभी-कभी कुछ बातें जो हम कह नहीं पाते....कर नहीं पाते ...उसे लिख देते हैं। जरूरी नहीं वो बातें बहुत जरूरी ही हों....पर जरूरत के समय बातें बहुत जरूरी होती हैं,जो अनकही रह जाती हैं। वो अनकही बातें भले ही कभी कह दी जाएं.....पर वो उस समय के लिए अनकही ही बनकर रह जाती हैं।वही उतर जाती हैं पन्नों पर स्याही के सहारे जो कभी उतर नहीं पातीं किसी के दिल की गहराइयों तक...वही अनकही बातें....

                                   मेरी ही कलम से....

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...