एक बेटे ने अपनी ग्रामीण माँ को
देना चाहा कोई कीमती धातु
ताकि माँ खुश हो जाए, माँ से अपर प्रेम जताने के यह तरीका उसे भा गया ,माँ सोने की धातु देख कभी ललचा जाती थी पर ,प्रकट न करती थी बच्चों का मुख देख मन मार लेती ,आज शहर में पला, जिसे माँ ने गरीबी का एहसास न होने दिया था ,वह अफसर बेटा माँ को कुछ देना चाहता है ,आभूषणों की सबसे महँगी दुकान पर वह सबसे कीमती आभूषण पेश करने को कहता है, दुकानदार महँगे आभूषण निकलता है उसके पास सोने -चाँदी,हीरे -मोती,प्लेटिनम सभी महँगी धातुओं के आभूषण थे ,बेटा सोच में पड़ गया अब क्या लें जो बजट में भी आ जाए, चाँदी तो लेनी न थी सोने चाँदी भी न भाए, प्लेटिनम की एक पतली चेन में लटकती पेंडल जो उसके बजट से बाहर थी उसे खरीदा माँ के लिए।
घर पहुँच कर बहुत ही प्यारी सी पैकिंग को माँ को थमाता बेटा अभिभूत हुआ जा रहा था ,माँ भी खुश ,बेटा क्या लाया मेरे लिए पर जैसे ही छोटे से डिब्बे से चेन निकाला माँ थोड़ी दुःखी हुई पर जाहिर न होने दिया,माँ ने कीमत पूछी तो बेटे ने कहा माँ! तुम्हारे लिए ये क्या इससे भी महँगी चीज ला सकता हूँ ...माँ खुश हो बेटे का मुख चूम लेती है।
दूसरे ही दिन माँ के चेन पर पड़ोसियों की नजर पड़ती है,पूछने पर माँ कहती उसके मन की बात पड़ोसी ने कह दी 'बेटे ने दिया होगा अफसर जो बन गया है ,चाँदी के गहने तो पहनती ही हो काकी बेटे से सोने का माँगा होता' माँ ने कहा 'मेरा बेटा सोने का भी लाएगा'।
-संगीता
Dr Sangita
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