भावनाओं के उमड़ते सागर लेकर,
कुछ सीप कुछ मूंगे मोती लेकर,
तुम्हारी स्मित मुस्कान को देखकर,
तुम्हारे आँखों के नमकीन कणों को देखकर,
बार-बार तुम्हारी छवि मेरे आँखों के सामने आती है,
जैसे तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो...........
---संगीता---
कुछ सीप कुछ मूंगे मोती लेकर,
तुम्हारी स्मित मुस्कान को देखकर,
तुम्हारे आँखों के नमकीन कणों को देखकर,
बार-बार तुम्हारी छवि मेरे आँखों के सामने आती है,
जैसे तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो...........
---संगीता---
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