Saturday, 3 February 2018

तुम हो

सावन तुम
बरसात भी तुम हो
गीले जज्बात ओढ़े
दिन -रात भी तुम हो
इंतजार में जिसकी
दिन दूनी
रात चौगनी
मिले भी तो,
कोरा एहसास भी तुम हो 
अटखेलियाँ करती हैं
मन की तरंगें जब ....
तब ,जो छा जाता है, तन -मन पर
अनमोल वह भाव भी तुम हो ।
                                     -संगीता


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