उतर आया पन्नों पर
जो तैरता था आँखों में,
किसी बंद लिफाफे सा
खुल गया था वो,
कोरे कागज पर
पानी की लिखावट को
पढ़ लिया था उसने,
किस्मत की
एक दूसरे को काटती रेखाँए
अबूझ भाषा सी ये लकीरें
पढ़ी नही जाती उससे भी....
-संगीता
जो तैरता था आँखों में,
किसी बंद लिफाफे सा
खुल गया था वो,
कोरे कागज पर
पानी की लिखावट को
पढ़ लिया था उसने,
किस्मत की
एक दूसरे को काटती रेखाँए
अबूझ भाषा सी ये लकीरें
पढ़ी नही जाती उससे भी....
-संगीता
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