ज्यादा दिन नही हुए
कुकृत्य ने करवट बदली
हर करवट पर दम घुटा
विदीर्ण लोहित काया लिए
सिसकती रही मानवता
इतिहास बन रहा है
पशुता का ....
आसिफा को भूलने में
वक़्त कहाँ लगेगा,
वासना के बाजार में
कोई और क्यूँ .... ?
नीचता का प्रगति चक्र घूम रहा है..
रोशनी को बुझाए,
द्वार पर
आहट सुनाई दी........?
-संगीता
कुकृत्य ने करवट बदली
हर करवट पर दम घुटा
विदीर्ण लोहित काया लिए
सिसकती रही मानवता
इतिहास बन रहा है
पशुता का ....
आसिफा को भूलने में
वक़्त कहाँ लगेगा,
वासना के बाजार में
कोई और क्यूँ .... ?
नीचता का प्रगति चक्र घूम रहा है..
रोशनी को बुझाए,
द्वार पर
आहट सुनाई दी........?
-संगीता
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