Sunday, 13 January 2019

सिलता है वो....

दरारों से जो झांकता है दर्द बनकर
वो दरारों की वजह भी है,
स्पर्श की सुई में प्रेम के धागे से
सिलता है वो किनारों को,
जिसमें दर्द बंद होता है .....
                            -संगीता
                       

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...