Thursday, 11 July 2019

ये बारिश...

ये बारिश....
बाहर भी, भीतर भी
तन भीगे न भीगे ,
मन भीग कर गुनगुनाता है।
कोई है जो ख्वाबों में ,
कभी ख्यालों में,
कभी सामने से मुस्कुराता है....
ये तो कहने की कोई बात ही नही ...
जो भीगा वो डूब जाता है,
जो डूबा ,
वो पार नही पाता है.....
                                    -संगीता

No comments:

Post a Comment

अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...