ये बारिश....
बाहर भी, भीतर भी
तन भीगे न भीगे ,
मन भीग कर गुनगुनाता है।
कोई है जो ख्वाबों में ,
कभी ख्यालों में,
कभी सामने से मुस्कुराता है....
ये तो कहने की कोई बात ही नही ...
जो भीगा वो डूब जाता है,
जो डूबा ,
वो पार नही पाता है.....
-संगीता
बाहर भी, भीतर भी
तन भीगे न भीगे ,
मन भीग कर गुनगुनाता है।
कोई है जो ख्वाबों में ,
कभी ख्यालों में,
कभी सामने से मुस्कुराता है....
ये तो कहने की कोई बात ही नही ...
जो भीगा वो डूब जाता है,
जो डूबा ,
वो पार नही पाता है.....
-संगीता
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