तुम्हारी आँखों मे झिलमिल सा
जो तैरता रहता है,
वो कब मेरी आँखों मे उतर आता है
समझ नही आता....
-संगीता
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...
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