Friday, 5 February 2021

वो नन्ही सी

 उसकी प्यारी सी थपकी 

गुम हो गई थी ..

उसके आँखों की मासूमियत

घुट सी रही थी...

महकते फूलों की पालकी में

जैसे काँटे उग आए हों

बिन माँ की बन्नी वो

नन्ही सी

 बिन पर की परी थी...

         - डॉ०संगीता


 


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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...