उसकी प्यारी सी थपकी
गुम हो गई थी ..
उसके आँखों की मासूमियत
घुट सी रही थी...
महकते फूलों की पालकी में
जैसे काँटे उग आए हों
बिन माँ की बन्नी वो
नन्ही सी
बिन पर की परी थी...
- डॉ०संगीता
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...
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