Saturday, 5 June 2021

कुछ बातें ....5

सूनी सड़क पर जहाँ तक नजर जाती है, वहाँ तक तुम्हें मुझसे दूर जाते हुए देखता हूँ... बस तुमसे एक ही चाहत ...तुम मुड़ -मुड़ कर मुझे एक नजर देख लो।तुम्हारा देखना ..बस देखना ही नहीं मुझमें उतरना भी है, जिसे तुम समझ नही सकती.…मैं... न जाने क्यों तुम्हें फिर भी समझाना चाहता हूं,तुम शायद ही कभी यह जान पाओगी कि तुम्हारी किताब में 'आई लव यू' मैंने ही लिखा था ...तुमने कभी पूछा ही नही ,जबकि तुम्हारी किताबें मैं ही तो लेता था पढ़ने के लिए ,पर ...कभी पढ़ नहीं पाता था ...बस...किताब के हर पन्ने पर तुम्हारी उंगलियों को महसूस करता रहता था।तुमने उन पन्नों को कभी तो पलटा होगा।कभी -कभी लगता है कि तुमने मेरा लिखा देखा ही नही था ,कि तुम कुछ पूछती...दिल करता है, फिर तुमसे कह दूँ कि 'मैं तुम्हें बेहद चाहता हूँ, इतना चाहता हूँ ,कि......बस...तुम्हारी खुशी मेरे साथ होने में नही है, यह जानते हुए भी..... तुम्हें प्यार करता हूँ ...बस ...तुम्हारे लिए जी सकता हूँ,तुम्हारे लिए...। आज अपने जीवन के उस मोड़ पर मैं खड़ा हूँ,जहाँ से दो रास्ते हैं एक तुम्हारी ओर.. और दूसरे पर चलकर मैं खुद से मिलूँगा, जो इस जीवन की सच्चाई है।वह सच्चाई जिसमें तुम नहीं होकर भी हो,कहीं न कहीं ...जानता हूँ ,दूसरी राह ही दिल चुनेगा... -मेरी ही कलम से

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...