Sunday, 13 June 2021

कुछ बातें...6

बारिशें ......कितना सुकून देती हैं न,प्रेमी के पहलू में बैठकर बिन पंख उड़ते जाना क्या होता है, वो एक प्रेमी मन ही समझ सकता है।खिड़कियों को भिगोती ये बूंदे जो रह-रहकर छू जाती हैं, और तन-मन को नए रोमांच से भर देती हैं।हर तरफ बारिशें ही बारिशें दिन-रात।ऐसे में दिल यही चाहता है ये बारिशें दिलों में यूँ ठहर जाएँ कि ,कभी.. कहीं न जाएँ। दूसरा पहलू एक गरीब माँ की भीगी गोद मे ,खाने की जिद करता बच्चा जो बारिश को नही जानता पर ,भीगता है अपनी माँ के आँचल में ,उसके लिए बारिशें भूखा सोने के लिए विवश करती हैं, वो चाहता है बारिश कभी न हो।उसे बारिशें बिल्कुल अच्छी नही लगती।भूखे सोना क्या होता है वो चाय और पकौड़े के मजे लेने वाला क्या समझे..

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अपनी ओर

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