Friday, 15 July 2022

कुछ बातें...23

जीवन में कठिनाइयां बहुत है पर उन कठिनाइयों को कठिनाई न समझ कर जीवन के लिए एक संघर्ष समझना चाहिए। जिसके लिए जीते हैं किसी की राहों में रेशम समझ जाना, फूलों की गलियां बन जाना ,आसान नहीं होता। कांटों की चुभन भी स्वीकार करने पड़ते हैं। कोई किसी को रोककर रखना चाहता है तो समझ लो कि वह अपनी सांस रोक कर बैठा है और सांस ज्यादा देर तक रोकी नहीं जा सकती नहीं तो इंसान स्वास मुक्त हो जाता है जिसे जाना है वह जाकर रहेगा जिसे रुकना है वह कभी जाने की बात नहीं करेगा पर यह सारी बातें तृषा के समझ में नहीं आता वह तृषा है अयान की जिंदगी में तृषा की अहमियत कब इतनी बन गई कि अब अहम बीच में आ गया अहम और वहम मन के रोग हैं। जो मन के साथ-साथ शरीर को भी रोगी बना देते हैं ।यह रोग तृषा को भी है जीवन मैं जितनी नीरसता हम भरते जाएंगे उतने ही दुखी होंगे क्योंकि यह दुख सभी दुखों से परे हैं इसकी कोई दवा नहीं प्रसन्न रहना भी इतना आसान नहीं है ,जितना कहना प्रसन्नता माथे के चंदन की तरह तो है जो मन प्रसन्न रखने में कारगर होती है, किंतु जब हृदय और मस्तिष्क दोनों का समन्वय न हो तब घड़ियां बिताना मुश्किल हो जाता है। इसे अयान भी नहीं समझता वह परीक्षा के लिए अपना सब कुछ छोड़कर आगे बढ़ना चाहता है।तृषा उसके लिए अब सोने की जंजीर थी। -अपनी ही कलम से

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...