Thursday, 1 June 2023

कुछ बातें...32

 बहुत ही कठोर है ये शब्द 

जहाँ  भावनाएं शून्य 

असीम मोह भी तुच्छ 

किसी का परित्याग,सरल नहीं 

अंदर से टूटा बिखरा इंसान 

तिनके के सहारे से नदी पार करना चाहता है,पर वह कर नहीं सकता 

अबोध पन की  मित्रता में अगर बोध आ जाए तो उसे भी त्याग देना ही सही है 

गहरी नींद से जैसे किसी ने झकझोर कर जगाया हो ....

      Dr. Sangita

        Lucknow 

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...