ठहरना या रुक जाना उम्र भर के लिए
तुम्हारी बातों का वो मर्म जो था वही रख सको तो रखना
सदा के लिए
क्योंकि बातों में कोई दरवाजा तो नहीं
पर ,जब बातें बंद हो जाती हैं तो रिश्ते भी नजरबंद हो जाते हैं
मेरी ही कलम से....
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...
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