आज ट्रैफिक के बीच कुछ ऐसा देखा मैंने की जुबाँ को जैस पक्षाघात सा हो गया हो ...एक माँ के दो बेटे जिनके कन्धे को अपना सहारा बनाने के लिए माँ ने कदम बढ़ाये पर वो गिर पड़ी ।उसके कण्ठ ने जैसे स्वरों का मार्ग अवरुद्ध कर दिया हो ..उसकी आँखें क्षण भर के लिए जैसे अपने बेटों से उत्तर पाने के लिए उत्सुक हुई हों... पर निराशा से नत आँखों में उत्तर साफ दिखने लगा ,कि बेटों ने माँ को सहारा क्यों नही दिया.....तबतक एक बेटे ने माँ को झटके से उठाया मुझे क्षण भर में ही स्वयं के अनुमान पर आशंका हुई ,इसी क्षण भर में ही उस बेटे ने अपनी माँ को दस गुना वेग से जमीन पर पटका ।मैं स्तब्ध ... ये क्या हुआ ? वहीं दूसरे बेटे ने उसी दस गुने वेग से माँ पर गालियों की बौछार की 'ई!!!साली अइसे ना मरी..... अरे...ई ..साली सब खाइ के मरी' इतने अपशब्द..... मैंन किसी को न कहते देखा है ..न सुना है।मुझसे न जाने क्यों बस मे बैठा नही गया जैसे ही बस आगे बढ़ी मेरे कदम भी आगे बढ़े और मैं नीचे उतर आइ उन बेटों का पशुवत् व्यवहार का कारण जानने के लिए... मुझे जो उत्तर मिला वह.....
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
अपनी ओर
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...
-
कुछ खरोंचे हैं मन -बदन पर तुम्हें जो दिखती हैं वो लकीरें खिंची हैं ... ढाल रही है जिंदगी अपने हिसाब से बेढब पत्थर सी वो पड़ी मिली थी... परिस्...
-
मीरा ने अपनी सारी सही करते हुए अतुल की ओर देखा। उसके देखते ही अतुल नजरें चुराते हुए ...फिर अचानक से उसपर झपटते हुए कहा,अब अपना रोना - धोना ...
-
जैसे जिंदगी एक तलाश थी तुम पर आकर रुक गई। कतरा-कतरा बह रहा तूँ रग-रग में जैसे .... शाम ए जिंदगी की बाती तुमसे मिलके जल उठी। ...
No comments:
Post a Comment