Wednesday, 15 November 2017

माँ...

माँ!  तुम मेरी पालनहार ,
मेरे जीवन का आधार हो।

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...