Wednesday, 6 December 2017

विचार ....

अपने जीवन का एक ध्येय मोक्ष को मानकर चलना और जीवन के मार्ग में आने वाली विपत्तियों के सामने घुटने टेक देना ,हार मान  लेना और अपने अधिकारों का हनन होने देना ,अहिंसावादी होकर खुद पर अत्याचार होने देना क्या कायरता न होगी ,बजाय इसके की हम अपने अधिकारों के प्रति सचेत हों, अपने या किसी अन्य पर हो रहे अत्याचारों का विरोध कर सकें।मार्ग या माध्यम में अहिंसा की अधिकता हो ,यह ध्यान रखकर यदि मोक्ष की और आगे बढ़ें तो मोक्ष का मार्ग सम्भवतः सरल हो सकता है।
                                       -संगीता

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...