गले में कुछ -
फँसा हुआ सा
नसों में कुछ -
सूखता हुआ सा
रगों में कुछ -
रुक हुआ सा
साँसों में कुछ -
थमा हुआ सा
वो जबसे है ..
कुछ न कुछ करवाता ही है
अपने इशारे पर ,
नचाने की ताकत रखता है वो,
सूखती अंतड़ियों की अकुलाहट
और ,
दिन में तारे दिखाता
जमीन पर गिरा देने की ताकत ,
उसमें है।
उसकी मार खाकर ,
निडर हुआ हर एक जीव
कृत्य -कुकृत्य सब भुलाकर
या मरता है ,
या ...मारने को विवश...भी होता है,
तर्क- वितर्क
सत्य-असत्य,
सबसे परे वह ,
जीव के जीवन भर
क्षुधा भरने पर ,
मन भरने पर ,
वो ,जो ...दिखता नही
चेतना को चैतन्य कर,
रग -रग में प्राण का संचार कर
स्वतः ही मर जाता है।
-संगीता
फँसा हुआ सा
नसों में कुछ -
सूखता हुआ सा
रगों में कुछ -
रुक हुआ सा
साँसों में कुछ -
थमा हुआ सा
वो जबसे है ..
कुछ न कुछ करवाता ही है
अपने इशारे पर ,
नचाने की ताकत रखता है वो,
सूखती अंतड़ियों की अकुलाहट
और ,
दिन में तारे दिखाता
जमीन पर गिरा देने की ताकत ,
उसमें है।
उसकी मार खाकर ,
निडर हुआ हर एक जीव
कृत्य -कुकृत्य सब भुलाकर
या मरता है ,
या ...मारने को विवश...भी होता है,
तर्क- वितर्क
सत्य-असत्य,
सबसे परे वह ,
जीव के जीवन भर
क्षुधा भरने पर ,
मन भरने पर ,
वो ,जो ...दिखता नही
चेतना को चैतन्य कर,
रग -रग में प्राण का संचार कर
स्वतः ही मर जाता है।
-संगीता
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