Saturday, 6 January 2018

जाने कब ...

दर्द तो दिल में था
चेहरे पर कब आ गया
जो तुमने पढ़ लिया ,
चुपके से
कब आँसुओं को पीते हुए ,
देखा तुमने ,
मेरी आँखों में जो ,
आया न था ,
तुम किस मुद्दत की बात करते हो -
जो पल कभी
तुम्हारा न था ,
सब कुछ सुन लिया तुमने
मेरे कहे बगैर,
मेरे मुख से ,तो
कोई स्वर फूटा न था ,
तुम,  मरहम लिए
खड़े रहते हो ,
मेरी राहों में ....
राहें जख्मी करेंगी,
जानते हो जैसे -
मेरे हृदय तल तक
टटोल आते हो ...
मुझसे पूछे बिना ,
जानना चाहते हो ,
मेरी हर बात ,
पढ़ना चाहते हो,
 मेरे जीवन का हर पन्ना
मेरे होठों की
इंच -इंच मुस्कान
का ,माध्यम
बन जाना चाहते हो तुम
दूर से ही सही,
पर तुम,
मुझमें ही रहना चाहते हो
मुझमें ही
रम जाना  चाहते हो
कितनी शिद्दत है
तुम्हारी चाहत में
बिना कुछ कहे ,
सब कुछ ,
करना चाहते हो,
अनजान हूँ तुमसे
तुम्हारी मौजूदगी से मैं
पर तुम,
दरिया की हर मौज की तरह ,
हर पल
मौजूद रहना चाहते हो ...
क्यों मेरे लिए ,
आसमान समेटना चाहते हो ...
                                   -संगीता



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 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...