किसी के प्रेम की
मधुसिक्त वाणी में ,
खुद को सराबोर कर,
किसी के रूद्र रूप की
विकरालता में ,
खुद को ,
प्रस्तुत कर,
किसी की ,
दिव्यता में,
खुद को पुंजीभूत कर,
किसी के रुँधे गले से ,
निकलते ,
कम्पित स्वर को ,
किसी की प्रार्थना में,
खुद को ,
पूर्णतः पाकर,
किसी के ,
स्निग्ध स्पर्श को
खुद पर ,
अनुभव कर,
किसी की ,
नफरत से
खुद को
निकाल कर ,
किसी की ,
ध्वनि में
खुद के
गीत को ,
कभी फिसलती जमीन पर
खुद को
रोककर,
किसी के
सौ सवालों का
एक जबाब होकर .....
क्या पाया....?
-संगीता
मधुसिक्त वाणी में ,
खुद को सराबोर कर,
किसी के रूद्र रूप की
विकरालता में ,
खुद को ,
प्रस्तुत कर,
किसी की ,
दिव्यता में,
खुद को पुंजीभूत कर,
किसी के रुँधे गले से ,
निकलते ,
कम्पित स्वर को ,
किसी की प्रार्थना में,
खुद को ,
पूर्णतः पाकर,
किसी के ,
स्निग्ध स्पर्श को
खुद पर ,
अनुभव कर,
किसी की ,
नफरत से
खुद को
निकाल कर ,
किसी की ,
ध्वनि में
खुद के
गीत को ,
कभी फिसलती जमीन पर
खुद को
रोककर,
किसी के
सौ सवालों का
एक जबाब होकर .....
क्या पाया....?
-संगीता
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