Wednesday, 28 February 2018

वो....

हाथ थमा  कर  मुझे
वो घूम आया जग सारा,
मैं  बैठी ही रही राहों में
मन तो उसके साथ ही गया था
पर,
उसके  आने पर भी
मेरा मन  नही आया,
उसकी खूबसूरत  सी तस्वीर पर
ठहरी मेरी नजर.....
जीवन्तता  चाहती है,
कैद मुस्कान  को खुद पर
बिखरते देखना चाहती है....

                           -संगीता

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...