हाथ थमा कर मुझे
वो घूम आया जग सारा,
मैं बैठी ही रही राहों में
मन तो उसके साथ ही गया था
पर,
उसके आने पर भी
मेरा मन नही आया,
उसकी खूबसूरत सी तस्वीर पर
ठहरी मेरी नजर.....
जीवन्तता चाहती है,
कैद मुस्कान को खुद पर
बिखरते देखना चाहती है....
-संगीता
वो घूम आया जग सारा,
मैं बैठी ही रही राहों में
मन तो उसके साथ ही गया था
पर,
उसके आने पर भी
मेरा मन नही आया,
उसकी खूबसूरत सी तस्वीर पर
ठहरी मेरी नजर.....
जीवन्तता चाहती है,
कैद मुस्कान को खुद पर
बिखरते देखना चाहती है....
-संगीता
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