Friday, 2 March 2018

मेरे माथे पर लिखा है.....

मेरी  किताबी  उपाधियाँ
कोरे  कागज  सी लगती  हैं मुझे ,
पढ़ डाले कितने  ही  पन्ने
पर, पढ़ न पाई शक्ल की लिखावट,
हर  बार उलझन  बढकर  कहती  है-
'दिल  की सुनो'
पर, दिल  किसी  की सुनता  नही
  दिल  का  कोई  मोल  जमाने  में  नहीं
 उसी दिल  के कारण,
हर कोई  पढ़  लेता  है
सूरत  मेरी,
जिसपर  लिखा है....
'मैं  बेवकूफ  हूँ'
                   -संगीता



1 comment:

  1. समझ समझ का नज़रिया होता है नज़रो का कोई किसी को गलत कहता है कोई किसी को गलत समझता है दुनिया मे सब बेकूफ़ है समझदार तो लोग खुद समझते है अपने को

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...