अनुपम हो तुम
श्रृंगार ,
हर्ष-विषाद
भक्ति -वात्सल्य
अनुराग -विराग
काम -मोक्ष
रसयुक्त -रसहीन
मूल्यों का संचालन तुमसे
जीव ...निर्जीव ..तुम बिन
तुम्हारा साम्राज्य
तुम्हारी अलौकिक क्षमता
जगत से परे
असीमित विस्तार मनों पर
तुम्हारे दोनों पहलू
प्रतीक्षा-परिणति
क्षणिक सुखदायी
दीर्घ दुखदायी
फिर भी ,
तुमसे आबद्ध हैं हम।
-संगीता
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