थक जाती हूँ.....
मुस्कुरा कर हर रोज
सच्ची मुस्कान गुम सी है..
खुद से ही करती हूँ हजार बातें
आवाज कोई मेरी सुनता ही नही....
पढ़ लेती हूँ
मन के कोरे कागज भी
जिन्दगी ने न जाने कब,
पढ़ना सिखा दिया...
खंजर सी चुभती बातें मुझे
तरस गए है कान मिठास के लिए....
-संगीता
मुस्कुरा कर हर रोज
सच्ची मुस्कान गुम सी है..
खुद से ही करती हूँ हजार बातें
आवाज कोई मेरी सुनता ही नही....
पढ़ लेती हूँ
मन के कोरे कागज भी
जिन्दगी ने न जाने कब,
पढ़ना सिखा दिया...
खंजर सी चुभती बातें मुझे
तरस गए है कान मिठास के लिए....
-संगीता
Very nice
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