Saturday, 15 December 2018

तुम्हारे शब्द ....

तुम्हारे शब्द तुम्हें तोलते हैं,
झूठ नही ,हम सच बोलते हैं...
जब चाहे परख लेना मुझे
हवाओं की तरह हम नही डोलते हैं...
                                  - संगीता

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...