Saturday, 27 July 2019

ऐसा लगता है..

  तुम हवाओं में घुले हो
किसी सुगन्ध की तरह ,
मोतियों की लड़ियाँ 
जैसे टिकी हों डालियों पर
तुम हल्के झोंके संग 
छू जाते हो 
और,
मिटा देते हो झटके से 
मोतियों का रूप....
देकर अपनी सुगन्ध...
               -संगीता



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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...