तुम हवाओं में घुले हो
किसी सुगन्ध की तरह ,
मोतियों की लड़ियाँ
जैसे टिकी हों डालियों पर
तुम हल्के झोंके संग
छू जाते हो
और,
मिटा देते हो झटके से
मोतियों का रूप....
देकर अपनी सुगन्ध...
-संगीता
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...
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