अनुभवों की आँच पर,
तप- तप कर निखरे हैं।
खुशियों को समेटते हुए,
हम तो बिखरे हैं।
पा लिया है थोड़ा सा ,
अपना आसमान भी ।
यही पाने की चाह में ,
आँधियों से गुजरे हैं।
-संगीता
तप- तप कर निखरे हैं।
खुशियों को समेटते हुए,
हम तो बिखरे हैं।
पा लिया है थोड़ा सा ,
अपना आसमान भी ।
यही पाने की चाह में ,
आँधियों से गुजरे हैं।
-संगीता
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