तकलीफों के दामन में
काटों की किस्म -किस्म की शक्लें
पर,चुभते एक से हैं।
हर कहीं देखा,
दर्द की भरी दुकान में,
कोई भी दर्द मीठा नही होता।
भर जाती है झोली
बिन मांगे...
दामन अपने -अपने हैं
काटें भी अपने -अपने
-संगीता
काटों की किस्म -किस्म की शक्लें
पर,चुभते एक से हैं।
हर कहीं देखा,
दर्द की भरी दुकान में,
कोई भी दर्द मीठा नही होता।
भर जाती है झोली
बिन मांगे...
दामन अपने -अपने हैं
काटें भी अपने -अपने
-संगीता
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