Monday, 19 October 2020

तरल हो उठा

पत्थर भी कुछ कह उठा
सुनकर न सुनने वाली वो बात
साँसों से लड़ रही थी
एक नन्ही सी जान
सिसकियों में लिपटी 
वो माँ तो न थी 
फिर भी शिला वो
तरल हो रही 
सुन लो जरा 
वो ,कुछ तो कह रही .... 
चट्टानों का दिल भी
तरल हो उठा
         -डॉ० संगीता

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