Friday, 27 May 2022
कुछ बातें 14. ..
मीतू तू मेरे कानों में ये जो हल्के-हल्के से अपनी साँस घोलता है न ,न जाने क्यों मुझे एक सिहरन सी होने लगती है।ऐसा लगता है कि तुन इसी बहाने मेरे गालों को चुम लेगा।पर,तुझे तो मेरी आँखों मे देखने का मन ही नही होता।एक मैं हूँ बार-बार तेरे सामने आ जाती हूँ।कि तूँ देखे तो सही।लेकिन मुझे अच्छे से पता है कि तूँ भी मेरे जैसा ही महसूस करता है ।पर,मेरे लिए नहीं।मीतू तूँ इतना बस जान ले दो लोगो के प्रेम सम्बन्ध में कोई एक ही प्रेम करता है दूसरा तो उसले प्रत्युत्तर में ही व्यवहार करता है।मीतू...
मेरी ही कलम से...
-संगीता
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अपनी ओर
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...
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