Thursday, 2 June 2022

कुछ बातें...17

मोहिनी सजती है, सँवरती है, पर अधूरी रह जाती है ।क्योंकि उसके होठों पर वह मुस्कान नजर नहीं आती जो उसके चेहरे को चमकते चांद का टुकड़ा बना देती है। उसने अपने पड़ोसी सुरेश को देखा और देखते ही उसकी तरफ बढ़ने लगी। बढ़ तो रही थे पर, ऐसा लग रहा था यह कदम आगे नहीं पीछे ही बढ़ रहे हों।मोहिनी ने आवाज दी,सुरेश! सुरेश तुम बहुत अच्छे हो।मैं तुमसे अपने दुर्व्यवहार के लिए माफी चाहती हूँ।मैंने तुम्हारे साथ कभी अच्छा नहीं किया। मेरे इतने "दुत्कारने के बाद भी तुम मेरे एक बार कहने पर मेरे पास आ जाते हो ,जी तो नहीं करता कि किसी से अपने दिल की बात कहूं पर न जाने क्यों आज मन बहुत बेचैन है। इतना बेचैन है ,कि कुछ सूझ नहीं रहा ।इस समय तुम्हारा ख्याल आया।एक तुम हो जो मेरे साथ खड़े हो जाते हो ।तुमसे कुछ कहना चाहती हूं ,वह कहना चाहती हूं जो मैं किसी और से नहीं कह सकती। मुझे पता है कि तुम मेरे बारे में अच्छा नहीं सोचोगे। फिर भी ,मैं तुमसे हर एक बात कहना चाहती हूं जो मुझ पर बीत रही है ।जिस पीड़ा को मैं भोग रही हूं ।मेरी हर बात सुनकर तुम शायद मुझसे नफरत करोगे। फिर भी ,मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं ।पता है ,किसी की याद में जिंदा रहना जैसे हर पल अपने आप को अपने शरीर को ढोने जैसा लगता है ।कोई भी आवाज ,कोई भी आहट सिर्फ उसी की याद दिलाती है। दिल की हर एक धड़कन धड़कती है ।पर, नाम उसी का …..ऐसा लगता है बार-बार कोई पुकार रहा है। बार-बार कोई कह रहा हो कि वह दूर जा रहा है। दूर….. इतनी दूर ….कि जहां से वापस आना मुश्किल है। उसके पीछे -पीछे नहीं भागा जा सकता है।मुझे ठहरना है,उसे गतिमान रहना है।दोनों एक साथ हो कैसे हो सकता है। एक जगह ठहर कर गतिशील कैसे रहा जाए। सोचती हूँ तुमसे जुड़ी हर एक बात जो मैंने तुम्हारे लिए महसूस किया है ।सबकुछ बयां कर दू। पर,यही सोचती हूं की जान कर भी तुम क्या कर सकोगे।मुझपर हँसोगे और खुश हो लोगे की तुमने मुझे अपने प्यार से मात दे ही दी। बस तुम्हारी बातें ...तुम्हारी आंखों में जब भी मैं देखती हूं मुझे ऐसा लगता है कि मेरे लिए बहुत सारा प्यार ...…ऐसा लगता है कि मैं सही हूं वह प्यार सिर्फ मेरा है, पर, हो सकता है कि वो मेरा हो ही ना।यह स्थिति कैसे बन जाती है।मुझे आज तक नहीं समझ में आया आज तक मैं नहीं नहीं जान पाई की मैं तुमसे इतनी गहराई से कैसे जुड़ गई ।तुम मुझे बिल्कुल पसंद नहीं…. कभी भी पसंद नहीं रहे। फिर भी, तुमसे ऐसा लगाव कि तुमसे छूटता ही नहीं।इस मन का क्या करूं जो तुम्हारी तरफ़ ही भागता है।हर पल ऐसे लगता है तुम मेरे पास पास…. मेरे बहुत करीब…. पर ऐसा नहीं है। हृदय की गति अचानक से तेज हो जाती है।सब याद आने लगता है।नींद भी बहुत मुश्किल से आती है। रात में कितने घण्टों का जागरण, मेरी जिंदगी असहाय बना रहा है।तुम्हारा प्यार, तुम्हारा हर एक एहसास,तुम्हारा वह केयर करना, मेरे माथे को चूमना, मुझसे गले से लिपट कर अपने प्यार का इजहार करना ।मेरी हर एक बदतमीजी उनको हंस कर टाल देना ।इतना कुछ जो तुमने किया। मेरे हर कदम पर साथ खड़े रहे। मैंने तुम से पीछा छुड़ाने की बहुत कोशिश की पर नाकाम रही, यह सोच कर तुम मुझसे प्यार करते हो बहुत प्यार करते हो ।तुम्हारी आंखों में मैंने प्यार देखा है। पर ,आज कितना मुश्किल लग रहा है। जब मैं देखती हूं कि तुम्हारी आंखों में कोई और ही है।तुम उसके पास हो, सारे अधिकार उसी के पास, मेरे पास तुम्हारी याद ,तुम्हारे अलावा और कुछ भी तो नहीं मिलता ।मेरे आंसू कभी- कभी बहते रहते हैं। समझते ही नहीं। मैं इतनी कमजोर हो जाऊंगी मैंने कभी नहीं सोचा था। मैंने कभी नहीं सोचा था, कि मैं तुम्हें इस तरह से चाहूंगी जी करता है तुम्हें कसकर पकड़ कर जी, भर कर रो लूँ….. इतना रो लूं.. कि आंसू कभी न गिरें। पर ...ऐसा नहीं हो सकता तुम मेरी वह आदत हो जिसे मैं कभी बदलना ,सुधारना नहीं चाहती।मैं कैसे नहीं जान पायी की तुम मुझे छलते रहे बड़े प्यार से मेरे जीवन में यह पड़ाव।मोहिनी भूल चुकी है कि वह आकाश नही सुरेश के पास बैठी है।सुरेश को यह सुनकर ही तृप्ति मिल रही थी ,जैसे वो सारे शब्द उसके लिए ही हों…..मोहिनी का हाथ इस समय उसके हाथ मे जो था। मोहिनी की हर बात मोहक ही होती है। सुरेश को भी सुनकर ऐसा ही लग रहा था। वह सोचता है...कितने दिनों के बाद मोहिनी ने अपने दिल की बात मुझसे की। मैं क्या कर सकता हूं उसके लिए….. ऐसा क्या कर सकता हूं कि ,जिससे मोहिनी के चेहरे पर मुस्कान ला सकूँ मैं उसे उसकी आदत तो नहीं दिला सकता। उसकी चाहत नहीं दिला सकता क्योंकि वह किसी और का हो गया ।पर ,मैं मोहिनी का साथ कभी नहीं छोडूंगा ।भले ही वह मुझे सिर्फ एक दोस्त समझती हो ,पर मैं उसे अपनी जिंदगी समझता हूं ।एक ऐसी जिंदगी जिसे मैं जी नहीं सकता पर, उसकी याद में गुजार सकता हूं। जी करता है मैं भी उससे अपने दिल का हर एक राज बयां करूं ।खोल कर रख दूं अपने दिल को ,जिसे वह देख ले ….दिल के कोने -कोने में झांके और वहां देखें कि हर कोने में वही है। पर, ऐसा कह कर मैं उसकी दोस्ती नहीं खो सकता ।वह आती है ,मेरे पास बैठती है ।जी करता है मैं उसका हाथ थाम लूँ और इतना कसकर थाम लूँ कि ,कभी छूटे ना। पर,मैं यह भी नहीं कर सकता ।कितना प्यार वह आकाश से करती है ।उससे ज्यादा मैं नहीं कर सकता।पर, इतना जरूर कर सकता हूं। कि उसे अकेला नहीं छोड़ सकता ।उसे मेरा साथ बिल्कुल पसंद नहीं ।फिर भी, आज न जाने क्यों उसने मुझसे वह सब कुछ कहा जो एक अच्छे दोस्त को कहा जा सकता है।जो अपने एक राजदार को बताया जा सकता है। यह मेरे लिए कम नहीं, बहुत है। मैं कभी भी उसे अपना नहीं बनाना चाहूंगा।कहीं उसे यह न लग जाए कि,उसने जिस कंधे पर अपना सर टीका कर आंसू बहाए थे ...उसके बदले मैंने उससे उसका साथ मांग लिया…. मोहिनी यह कंधा हमेशा तुम्हारे लिए रहेगा ।हमेशा तुम जहां भी रहो, जिस हाल में भी रहो। बस ..मुझे एक आवाज दे देना ।एक हल्की सी आवाज ….आवाज नहीं तो बस मेरा ध्यान कर लेना ….क्योंकि मैं तुम्हारे ख्याल में भी आ गया तो खुद को खुशनसीब समझूंगा ।मोहिनी ने अपने जीवन में हर एक जगह खुद को स्थापित किया।वह जगह बनाई ...जहां तक पहुंचने में लोगों को कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ता है ।वह सारे संघर्ष ,वह सारी विकट परिस्थितियां, सब कुछ उसने झेला है ।बस एक चूक हो गई की उसने जिस से प्यार कर लिया वह उसका न हो सका उसे कैसे मैं समझाऊं की प्रेम में पा लेना ही सब कुछ नहीं है। प्रेम अपार पीड़ा का नाम है जिसे जीवन भर दिल से लगा कर रखना होता है। जो प्रेम प्रेमी पा लेता है उसे उसका मूल्य नहीं समझ में आता ।पर ,जो प्रेमी उस प्रेम के लिए तड़पता रहता है असल में वही प्रेम कर रहा होता है।प्रेम हमेशा से प्रेमी की खुशी से बढ़कर कुछ भी नहीं रहा ।प्रेम अलौकिक होता है और ,यह प्रेम यदि हद से बढ़ जाए तो आध्यात्मिक हो जाता है ।उस ईश्वर के बहुत पास आ जाता है ।जहां तक जाना संभव नहीं होता। मोहिनी... काश मैं तुम्हें बता पाता कि ...तुम मेरे कंधे पर सर रखी हो।मेरा कंधा तुम्हारे आंसुओं से भीगा है ।तुम्हारी साँसे बड़े आराम से तुम्हारे नाक से होते हुए बाहर से भीतर आ-जा रही हैं। तुम्हारे हाथ कसकर मेरे हाथों को पकड़े हुए हैं ।तुम्हारी आंखें बंद है पर तुम्हारे भीतरी संसार में दूर तक तुम सफर कर रही हो। तुम वहां तक सफर कर रही हो जब तुम उससे मिली थी। तुम्हें सुकून मिल रहा है मेरे कंधे पर। तुम्हें ऐसा लग रहा है कि तुम उसी के पास हो ,पर सच्चाई यही है कि तुम मेरे पास हो। तुम्हें हल्की सी आवाज नहीं लगाना चाहता कि, तुम उस संसार से बाहर आ जाओ और इस संसार को देखो जो तुम्हारे लिए सिर्फ तुम्हारे लिए है….मोहिनी… मेरी ही कलम से...

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अपनी ओर

 पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...