Thursday, 2 June 2022
कुछ बातें...18
स्त्रियां अपने पतियों के लिए इतने सारे व्रत उपवास,नियम विधि विधान क्यों करती हैं ...?जब सती प्रथा थी और जौहर प्रथा प्रचलित थी तब औरतों को ही जलना पड़ता था पुरुषों को नही ।पुरुष की श्रेष्ठता यह भी तय हुई।तब स्त्रियां। व्रत आदि जोर शोर से करने लगे अपने इष्ट की शरण में जाकर प्रार्थनाएं करने लगीं।कि उनका पति जीवित रहे ,उनका सौभाग्य बना रहे।क्योंकि पति के मृत्य के बाद पत्नी के हर एक अरमान ,सपने,लालसाएं,रंग ,रूप,सजना संवरना सबकी मृत्यु हो जाती है।
आज भी कितना बदल पाया है...?आज पति की मृत्यु के बाद उन्हें जलना नहीं पड़ता है, वो हर दूसरे विवाह कर लें तो सौभाग्य लौट आता है।पर,जो विधवा हैं.... उनसे कोई पूछे...?औरतों को हमेशा हासिये पर रखा जाता है।केंद्र में होते हुए भी वह हासिये तक पहुँचा दिया जाता है।औरतों ने कठोर नियम-व्रत का पालन किया की उनके पति की लंबी आयु हो ताकि वह भी सुहागन रह सकें,जी सकें।
ऐसा भी नही है कि पत्नियां अपने पतियों से प्यार नही करतीं।करती हैं, पर अपना सर्वस्व त्याग कर।कुछ पुरुष भी हैं जिनके भीतर स्त्रीत्व के गुण विद्यमान होते हैं जो अपनी पत्नी के लिए वह सबकुछ करने को तैयार रहते हैं, पर ऐसे पुरुषों को गिनने के लिए एक हाथ की उंगलियां ही काफी होंगी।नारी हजार सवाल न कर सकें इसलिए समय -समय पर उन्हें देवी बना दिया जाता है।जहाँ उनकी सारी आशाएं भी ध्वस्त हो जाती हैं, एक जर्जर भवन की तरह।फिर भी,कुछ भी बदलता नही है....नारी को भी उसकी जिंदगी जीने के लिए अवसर मिलना चाहिए,और विश्वास करना चाहिए कि जिन्हें यह अवसर मिलता है वह कई गुना उत्साह से अपने परिवार के लिए सबला बन जाती हैं।वह भटकती नहीं।ढूंढ लेती हैं खुद को....
मेरी ही कलम से. .
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